Life and Mission

बाबासाहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 को मध्यप्रदेश की महू छावनी में हुआ था. यह स्थान अब महाराष्ट्र में है. उनके पिताजी ब्रिटिश सेना में सूबेदार मेजर थे और महू स्थित एक सैनिक स्कूल के प्रिंसिपल थे. उनके पिताजी का नाम रामजी मालोजीराव और माताजी का नाम भीमाबाई था. बाबासाहेब का जन्म महाराष्ट्र की अछूत मानी जाने वाली ‘महार’ नामक जाति में हुआ था. उस समय तक ब्रिटिश सेना में ‘महारों’ को भर्ती  किया जाता था किन्तु 1893 में ब्राह्मणों की कारगुजारियों के चलते इस पर रोक लगा दी गई. अंग्रेज महारों की वीरता के कायल थे. 1 जनवरी 1818 को भीमा कोरेगांव के युद्ध में पेशवाओं के खिलाफ अंग्रेजों की तरफ से महार सैनिकों ने अभूतपूर्व वीरता का प्रदर्शन किया था. इस युद्ध में महज 500 महार सैनिकों ने ब्राह्मण पेशवाओं की 28000 की सेना को परास्त कर दिया था.

अम्बेडकर का पैतृक गांव था अम्बावडे, जो  कि महाराष्ट्र के रत्नागिरी जनपद में पड़ता है. उनका परिवार एक प्रतिष्ठित परिवार था. दादा मालोजी सकपाल एक रिटायर्ड सैनिक थे. उनकी दो संताने थीं– एक, हमारे मसीहा के पिता मालोजी सकपाल और एक पुत्री जिनका नाम मीरा था.

बाबासाहेब का परिवार एक धार्मिक परिवार था और कबीरपंथ का अनुयायी था. संत कबीर ने जाति-पांति का कड़ा विरोध किया था. वह गाया करते थे —

  जाति-पांति पूछे नहि कोई, हरि को भजे सो हरि को होई.

बाबासाहेब के बचपन का नाम भीम सकपाल था. परिवार के सदस्य उन्हें प्यार से ‘भीम’ कहकर पुकारा करते थे. भीम उस समय मुश्किल से दो वर्ष के थे कि उसी समय उनके पिता ब्रिटिश सेना से रिटायर होगये. सेवानिवृति के बाद उनके पिता दापोली पहुँच गए जोकि महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में पड़ता है. यहीं पर भीम ने  अपने बड़े भाई के साथ अपनी प्राथमिक शिक्षा  प्रारम्भ की. कुछ दिन बाद उनके पिता रामजी सकपाल को दापोली छोड़ना पड़ा. नौकरी की तलाश में वे बम्बई चले गए और कुछ समय बाद उन्हें सतारा में एक नौकरी मिल गई.

प्राथमिक शिक्षा की शुरुआत में ही बालक भीम को अस्पृश्यता का दंश झेलना पड़ा. विद्यालय में प्रवेश तो मिल गया किन्तु एक मुश्किल शर्त के साथ. बालक भीम सहित छः अछूत बच्चों  को प्रवेश मिला. शर्त यह थी कि वे चार बच्चे एक अलग कमरे में रहेंगे और कभी भी सवर्ण बच्चों के साथ संपर्क में नही आयेंगे. सबसे कठिन शर्त थी कि वे विद्यालय के मटके से जल नही पीसकते थे. सवर्ण अध्यापक कभी भी उस कमरे में प्रवेश नही करता था जिसमे वो छः अछूत बच्चे रहते थे. वह कभी-कभार कमरे के दरवाजे पर आता तो बच्चे दूर से अपनी स्लेट उसके सामने रख देते. किन्तु दूर से सुनने की वजह से कई बार बच्चे ठीक से कुछ भी नही समझ पाते थे. उन छः बच्चों में अकेला भीम था जिसने आगे की पढाई जारी रखी. इस प्रकार बालक भीम को अपने जीवन में छुआछुत का पहला अनुभव हुआ.

लेखन जारी है……….

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